12 हजार लोग 15 फरवरी के बाद लौटे विदेशों से

  • प्रदेश सरकार ने जिलावार तैयार करवाई सूची, इंदौर में 4415 लोग आए, इन सभी की होगी जांच

इंदौर। समय रहते केंद्र सरकार ने विदेशों से आने वाले यात्रियों पर न तो रोक लगाई और न ही उनकी जांच करवाई , जिसके चलते देश भर में इन विदेश से आये यात्रियों ने कोरोना फैला दिया। अब मुख्यिमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर 15 फरवरी के बाद विदेशों से लौटे 12125 लोगों की जांच कराई जाएंगी, जिसके लिये जिलावार सूची बनाई गई हैं और इंदौर जिले में ऐसे 4415 लोग हैं, जो विदेश यात्राएं कर लौटें।

दिसंबर के माह में ही चीन के वुहान शहर में कोरोना वायरस का प्रकोप शुरू हो गया था, जो जनवरी और फरवरी में बढ़ता गया। अगर केंद्र की मोदी सरकार 1 फरवरी से ही विदेश से आने वाले सभी यात्रियों की जांच करा कर उन्हें 14 दिन के आइसोलेशन में रहने के निर्देश देती तो यह लोग देश भर में कोरोना वायरस नहीं फैला पाते, क्योंकि भारत में कोरोना इन्हीं भारतीय लोगों से आया जो विदेश यात्रा कर लौटे। इनके संपर्क में आये अन्य लोगों को भी इस वायरस ने अपनी चपेट में ले लिया नतीजे में पूरा देश 21 दिन का लॉकडाउन भुगत रहा है। अब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश में विदेश से आये यात्रियों की स्क्रीनिंग कराने का निर्णय लिया हैं, जिसके चलते 15 फरवरी के बाद आये 12125 यात्री ऐसे चिन्हित किये गये, जो अलग अलग देशों की यात्रा कर मध्यप्रदेश पहुंचे हैं। इनमें सर्वाधिक संख्या इंदौर जिले की है, जहां 4415 लोग 15 फरवरी के बाद इंदौर पहुंचे। इसी तरह भोपाल जिले में ऐसे यात्रियों की संख्या 2605, ग्वालियर में 689, उज्जैन में 605, रतलाम में 510, नीमच में 206, खंडवा में 212, जबलपुर में 725, बैतुल में 112, छतरपुर में 195, धार में 134, देवास में 122, कटनी में 154, सागर में 205, सतना में 156, सीहोर में 135, शिवपुरी में 43, टिकमगढ़ में 28, विदिशा में 77, उमरिया में 20, सिंगरौली मेें 13, सिंधी और राजगढ़ में 12–12, पन्ना में 7, रायसेन में 29, मुरैना में 20, मंदसौर में 45, खरगोन में 51, झाबुआ में 14, हरदा में 13, डिंडौरी और दतिया में 3–3, छिंदवाड़ा मेें 98, बालाघाट में 20, बड़वानी में 15, अशोक नगर में 2, अनुपपुर में 5, अलीराजपुर में 1, आगर‑मालवा में 9, और इसी तरह शहडोल में भी 1 व्यक्ति ने विदेश यात्रा की। अब इन सभी 12125 लोगंों की स्क्रीनिंग कराई जाएंगी और इनमें अगर कोरोना के लक्षण मिले तो फिर इन्हें 14 दिन के आइसोलेशन में भेजा जाएंगा और इनके साथ ही परिवार के लोगों और इन लोगों ने किस किस से मुलाकात की उन सबकी भी सूची तैयार की जायेगी। अगर इसी तरह की सतर्कता पहले केंद्र सरकार अपना लेती तो स्थिति इतनी बहावह नहीं होती। 1 फरवरी के बाद ही सारी अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों को बंद कर दिया जाना था। और 4 से 5 दिन का समय विदेश यात्राओं पर गये लोगों को वापस लौटने के दिया जाता और विमानों के जरिये वापस लाकर सभी यात्रियों की जांच कराई जाती और तब तक उन्हें आइसोलेशन में ही रखा जाता, जब तक की उनकी जांच रिपोर्ट नेगेटिव नहीं आ जाती। इससे देश भर में विदेश से आये लोग कोरोना नहीं फैला पाते।

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