कोई अपनों की जान का दुश्मन कैसे हो सकता है… कोई धर्म या मजहब किसी की मौत का कारण कैसे बन सकता है… जब सरकार ने सारे देश के मंदिर बंद करा दिए… आराधना स्थलों को खाली करा लिया… खुद इमाम ने मस्जिदों में सामूहिक नमाज बंद कराकर घरों में […]

इंसान दो ही वक्त पलायन करता है-या तो अकेलापन सताए या फिर भूख से मरने की नौबत आए… हिंदुस्तान के सभी शहरों की सारी सड़कों पर उमड़ी लाखों लोगों की भीड़ अपनों से मिलने की बेताबी में सैकड़ों किलोमीटर लंबा पैदल सफर तय कर चली आ रही है… उनके चेहरे […]

कहीं आप अपनों के कातिल न बन जाएं…वक्त ही ऐसा है, खुद बचें, सबको बचाएं… समय सही है, बस सचेत होना बाकी है… अपने लिए… अपनों के लिए… अभी हमने मौतें देखी नहीं हैं, पर काल दरवाजे पर खड़ा है… जान लेने पर कुछ इस तरह अड़ा है कि एक […]

मरना कोई नहीं चाहता… डर सभी को लगता है.… लेकिन जिंदगी के रास्ते खोजने में वक्त तो लगता है… प्रशासन द्वारा कई शहरों में बारी-बारी लॉकडाउन किया जा रहा है.. लोगों को घरों में रहने और बाहर नहीं निकलने के लिए समझाया जा रहा है… फिर भी कई राज्यों में […]

अग्निबाण के प्राण‑पुरुष स्व. श्री नरेशचंदजी चेलावत की आज 37वीं पुण्यतिथि वक्त न यादों को हरा सकता है और न यादें वक्त से मिट पाती हैं… जितना वक्त गुजरता जाता है उतनी प्रबलता बढ़ती जाती है… क्योंकि स्मृतियां संस्कारों से जुड़ी होती हैं और संस्कार विचारों से… अग्निबाण के प्राण‑पुरुष […]

मोदीजी जब मानव बम देश में घुस रहे थे, तब आप उन्हें क्यों नहीं धकेल रहे थे… चूक तो आपसे भी हुई है मोदीजी… जब चीन में लाशें बिछ रही थी… इटली श्मशान बन रहा था… ब्रिटेन मेें भी मौत का दानव पसर रहा था… छूने से मरने का गजब […]

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जहां सरकार वहां सत्कार… दोगलों के कांधों पर सरकार बनाने वाली भाजपा के लिए भी यह सफर आसान नहीं होगा… उसे भी कई स्वार्थियों को साधना है… लोभियों को लुभाना है… लालचियों को टुकड़ा डालना है… बेईमानों को को अपना बनाना है और यह जानकर सत्ता को साधना है कि […]

अब तो कोई चमत्कार ही बचा सकता है सरकार… 22 विधायक कैद में पड़े हैं… मिलने-जुलने तक के वांदे पड़े हैं… बात करने तक की मोहताजी में सरकार के बंदे खड़े हैं… मंत्री जा रहे हैं… धक्के खा रहे हैं… हिरासत में डाले जा रहे हैं… फिर भी दिग्गी-नाथ सरकार […]

यही तो है गड़बड़ की जड़… जो दोस्ती का दावा जताए… वो दोस्त के मान की हिफाजत न कर पाए… दोस्त घुटन में रह-रहकर दिन बिताए… जो आंखों की तो क्या जुबान की भाषा न समझ पाए… जो जिद तो क्या जरूरत तक पूरी न कर पाए… जो दूसरों की […]

राज्यसभा की सीढ़ी और सत्ता में प्रवेश… अभी तो सिंधिया के लिए यह अहसास बेहद ही सुखद होगा… लेकिन जो लोग भगवा को जानते हैं, उसकी तासीर को पहचानते हैं… उनके चलन, मंशाओं और इरादों को भांपते हैं… उन्हें सिंधिया का यह समाधान कदापि नहीं सुहाएगा… आज पहनाया ताज तब […]

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