दिल्‍ली सरकार करेगी सेंटर मरकज मौलाना के खिलाफ एफआइआर


केजरीवाल सरकार कराएगी तबलीगी जमात के सेंटर मरकज के मौलाना के खिलाफ एफआइआर निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात के सेंटर मरकज में 1 से 15 मार्च तक 5 हजार से ज्यादा लोग आए थे। इनमें इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड के लोग भी शामिल थे। 22 मार्च को लॉकडाउन की घोषणा के बाद भी यहां 2 हजार लोग ठहरे हुए थे। इनमें से 200 लोगों के कोरोना संक्रमित होने की आशंका है। इसके बाद मौलाना के खिलाफ केजरीवाल सरकार एफआईआर दर्ज कराएगी । इसमें भी कोरोना का जो भय बना हुआ है वह बढ़ी उम्र के लोगों के लिए अधिक है, जिसमें कि यहां रहने वाले लोगों में ज्यादातर लोगों की उम्र 60 साल से ऊपर बताई गइ र्है।

जानकारी सामने आने के बाद दिल्‍ली प्रशासन द्वारा संदिग्धों को जांच के लिए अस्पताल भेजा गया है। इन्हें सर्दी, खांसी और जुकाम की शिकायत है। इस जगह से 1200 लोगों को निकाला जा रहा है। तबलीगी जमात के सेंटर से रविवार को दिल्ली के एनएजजेयू अस्पताल में 34 लोगों को जांच के लिए लाया गया और सभी कोरोना संक्रमण के संदिग्ध बताए जा रहे हैं।

बतादें कि निजामुद्दीन का यह मरकज इस्लामी शिक्षा का दुनिया में सबसे बड़ा केंद्र है। यहां कई देशों के लोग आते रहते हैं। मरकज से कुछ ही दूर सूफी निजामुद्दीन औलिया की दरगाह है। लेकिन, इन दिनों यह बंद है। पुलिस ने बताया कि लॉकडाउन से पहले ही यहां से भीड़ हटाने के लिए प्रयास किए जा रहे थे। लोगों से अपील की जा रही थी, लेकिन तब्लीगी मरकज में जमा लोगों ने बात नहीं सुनी। अब प्रशासन ने मरकज के आसपास के इलाके को पूरी तरह सील कर दिया गया है।

अभी यहां आए लोगों में से एक 64 साल के व्यक्ति की मौत हो गई है, वह तमिलनाडु का रहने वाला था। दिल्ली सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि देश में 24 मार्च रात 12 बजे लॉकडाउन लागू हुआ तब हर होटल, गेस्ट हाउस, हॉस्टल के मालिक और प्रशासक को कहा गया था कि सामाजिक दूरी बनाए रखने का कर्तव्य पालन सभी को करना है, लेकिन यहां पर कोई सामाजिक दूरी का पालन नहीं किया गया है।

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