क्वीन कहीं कंगाल न बन जाए…


सब शैतान… कंगना शरीफ… तोहमतें थोपने वाली बॉलीवुड की इस क्वीन ने किसी को नहीं बख्शा… जिसने बनाया… शिखर पर पहुंचाया… उसी फिल्मी दुनिया पर भाई-भतीजावाद का इल्जाम लगाया… किसी को नशेड़ी तो किसी को गुंडा-मवाली बताया… मुंबई को पाकिस्तानी कश्मीर तो पुलिस को अपराधी बताया… कंगना के इन्हीं डायलागों पर सत्ता की साजिशों के ठेेकेदारों ने छाती चौड़ी कर उसे सलाम का पैगाम भिजवाया और हिफाजत के लिए पूरी फौज को साथ लगाया… चैनलों ने चीख-चीखकर आग में घी डालने का धर्म निभाया… कभी सुशांत… कभी रिया तो अब कंगना के डायलागों को छोटे पर्दे का मेहमान बनाया… कंगना नाम का दाना डालकर नेताओं को लड़वाया… दिल्ली से लेकर मुंबई तक की जंग का हिस्सा बन चुकी नादान क्वीन को इस बात का जरा भी इल्म नहीं है कि वह गुंडों के चंगुल में फंस चुकी है… सत्ता के संघर्ष का हथियार बन चुकी है… इस नाजुक कली को हर जगह कुचला, मसला जाएगा… फिल्मी दुनिया उससे तौबा कर लेगी… मुंबई की महानगरी उससे बदलने लेने के कोई मौके नहीं चूकेगी… काम तो काम अब लोग राम-राम करने से हिचकेंगे… साथ देने वालों पर शिवसैनिक आंखें तरेरने लगेंगे… दम ठोंककर मुंबई आने वाली कंगना को जब मुंबई में पानी पिलाने वाले नहीं मिलेगा, तब उसे समझ में आएगा कि हौसला दिखाना अच्छा होता है, लेकिन हिमाकत पर उतर आना वजूद मिटा डालता है… सुशांत संग्राम को समझे-बूझे बिना जुबान फंसाने वाली कंगना ने बॉलीवुड पर भाई-भतीजावाद का आरोप लगाया, लेकिन रिश्तों की बुनियाद के बिना कंगना का फिल्मों में अवसर पाना खुद इस आरोप को झूठा साबित करता है… यदि फिल्मों में केवल भाई-भतीजे अवसर पाते तो न कंगना, न सुशांत कभी आगे बढ़ पाते… अपने ही फिल्मी साथियों पर नशे की लत का आरोप लगाने वाली कंगना यदि नशे से दूर है तो यह इस बात का सबूत है कि जो बिगडऩा चाहे उसे कोई रोक नहीं सकता… और जो बचना चाहे उसे कोई झोंक नहीं सकता… दुनिया बुरे लोगों से नहीं अच्छे लोगों से चलती है… और बुराई भी कर्मों की सजा भोगकर रहती है। चाहे वह नशे का शिकार संजय दत्त हों… या फिरोज खान का बेटा फरदीन… सभी ने बुरे वक्त को भोगा और खुद को कोसा… कंगना की फिसलती जुबान महाराष्ट्र को पाकिस्तानी कश्मीर तथा पुलिस के मुखिया को नाकारा कहने से नहीं चूकी। दोनों ही बातों में न संवाद का संस्कार था और न ही आरोपों की प्रामाणिकता…जो मुंबई को अपना समझता है उसके दिल पर ठेस लगी और जो ईमानदारी से खाकी पहनता है उसे चोट पहुंची… अब कंगना अमित शाह की फौज लेकर मुंबई आए या देशभर में अपना रुतबा दिखाए… यह तय है कि अब शरीफ उससे घबराएंगे… दर्जनभर कमांडो ही अब उसके सामान्य जीवन में दखल देकर शरीफों को डराएंगेे…जुम्मे-जुम्मे चंद साल मुंबई में बिताने एवं दो-चार फिल्मों से पहचान बनाने वाली कंगना को न तो सत्ता के रसूख का इल्म है न ही चेहरे की चमक और अदा की दमक बेचने वाली चकाचौंध भरी फिल्मी दुनिया के अंधेरे का… जहां चमकने वाला चेहरा यकायक खो जाता है… शिखर पर बैठा आदमी सडक़ पर आ जाता है… अब तक कई चेहरों को निगल चुके फिल्मी पर्दे पर फिर एक अक्स उभरा है… क्वीन से कंगाली तक के सफर पर फिर एक नादान निकला है…

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