उप्र की अर्थव्यवस्था में हथकरघा उद्योग का महत्वपूर्ण स्थान

– डॉ. कुलदीप त्यागी

उत्तर प्रदेश में खेती के बाद अर्थव्यवस्था में हथकरघा उद्योग का महत्वपूर्ण स्थान है। हथकरघा क्षेत्र रोजगार और उत्पादन की दृष्टि से उत्तर प्रदेश देश में तीसरे स्थान पर है। आधुनिक तकनीक और डिजाइन विकास ने इस उद्योग को एक नई पहचान दिलाने में सराहनीय और प्रमुख भूमिका निभाई है। देश में कुल बुनकरों की संख्या में से एक चौथाई बुनकर उत्तर प्रदेश में है, जो प्रदेश की जनता की वस्त्र आवश्यकता में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक धूम मचा रहे बुनकरों के उत्पाद
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुनकरों के कल्याण के लिए कई कल्याणकारी कदम उठाए हैं। उन्हें उनके उत्पाद का उचित मूल्य दिलाने के लिए बुनकरों को आर्थिक सहायता, कच्चे माल की सहज उपलब्धता, प्रबंधकीय एवं प्रशिक्षण की मदद, कार्यशालाओं का निर्माण, डाई एवं प्रोसेसिंग विपणन एवं ई-मार्केटिंग आदि की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इससे हथकरघा उद्योग न केवल गरीब जनता की आवश्यकताओं को ही पूरी कर रहा है, बल्कि अन्तर्राष्ट्रीय बाजार तक अपनी साख स्थापित किए हुए हैं। वाराणसी की साड़ियां, जामदानी, जामावर, ब्रोकेड, तनछुई, जगलां एवं बूटीदार की परम्परागत बुनाई शैली, कानपुर के रेडीमेड वस्त्र, गोरखपुर, मेरठ व अमरोहा के बेडशीट व बेडकवर, सीतापुर, भदोही, मिर्जापुर एवं आगरा की ऊनी एवं सूती दरियां, अलीगढ़ के दरेट, बाराबंकी का स्टोल व मऊरानीपुर की शर्टिंग, मेरठ व टांडा की लुंगी, मऊ व आजमगढ़ की साड़ियां व ड्रेस मैटेरियल के कपड़े बुनाई शैली की विविधता एवं उत्कृष्टता के बेजोड़ उदाहरण हथकरघा क्षेत्र के हैं।

कई योजनाएं चला रही केंद्र व राज्य सरकार
हथकरघा विभाग के सहयोग से राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम के अन्तर्गत कई योजनाएं प्रदेश में चल रही हैं। इनमें क्लस्टर विकास कार्यक्रम, विपणन प्रोत्साहन, हथकरघा विपणन सहायता, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, महात्मा गांधी बुनकर बीमा योजना, पावरलूम कामगारों के लिये समूह बीमा योजना तथा प्रधानमंत्री हथकरघा बुनकर मुद्रा योजना प्रमुख है।

राज्य सेक्टर की योजनाओं के अन्तर्गत हथकरघा क्षेत्र में प्रशिक्षणार्थियों को सहायता, पावरलूम, हथकरधा बुनकरों को विद्युत दर में छूट की प्रतिपूर्ति, पावरलूम क्षेत्र का विकास, बुनकरों को विद्युत आपूर्ति हेतु इनडिपेन्डेंट फीडर की व्यवस्था अन्य वित्तीय प्रोत्साहन एवं बुनाई विषय से इण्टरमीडिएट उत्तीर्ण छात्रों को छात्रवृत्ति, बुनाई विषय में इण्टरमीडिएट कालेजों को अनुदान, हथकरघा बुनकरों के सहायक कर्मियों को मानदेय, हथकरघा क्लस्टरों को अतिरिक्त अनुदान, देश एवं विदेश के बड़े शहरों में हथकरघा प्रदर्शनियों के आयोजन हेतु वित्तीय सहायता जैसी महत्वाकांक्षी कार्यक्रमों का क्रियान्वयन किया जा रहा है।

कोरोना काल में लिए कई फैसले
बुनकरों की माली स्थिति को देखते हुए कोरोना महामारी से प्रभावित हथकरघा एवं पावरलूम बुनकरों के कारोबार को देखते हुए उन्हें सरकार ने विद्युत दर में छूट की प्रतिपूर्ति की सुविधा दी। पावरलूम बुनकरों को फ्लैट रेट पर बिजली देने का फैसला किया गया है। हथकरघा बुनकरों को विद्युत दर में छूट की प्रतिपूर्ति हेतु वर्ष 2020-21 में पांच करोड़ रुपए तथा धुनकरों को विद्युत दर में छूट हेतु प्रतिपूर्ति के लिए एक करोड़ रुपए का प्रावधान किया है।  पावरलूम बुनकरों को विद्युत दर में छूट हेतु 150 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है।

डिप्लोमा कोर्स में मिलती है छात्रवृत्ति
केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा भारतीय हथकरघा प्रौद्यौगिकी संस्थान वाराणसी में त्रिवर्षीय डिप्लोमा कोर्स के प्रशिक्षणार्थियों के लिये छात्रवृत्ति के रूप में आर्थिक सहायता दी जाती है। इस वर्ष बजट में 7.19 लाख रुपए रखे गए हैं। परम्परागत पावरलूम उद्योग को आधुनिक एवं उच्चीकृत पावरलूम में परिवर्तित कर अनुसूचित जातिध्जनजाति के पावरलूम बुनकरों के जीवन स्तर में सुधार लाने के कदम उठाये गए हैं। एससी-एसटी के बुनकरों को आधुनिक तकनीक प्रशिक्षण, कार्यशाला का निर्माण, उच्चीकृत पावरलूम की स्थापना के माध्यम से लाभान्वित किया जाता है। इस योजना में 155 लाख रुपए से 50 इकाइयों के 200 पावरलूम बुनकरों को लाभान्वित किया गया है।

लगाए जा रहे स्वतंत्र बिजली फीडर
पावरलूम को पर्याप्त बिजली देने के लिए स्वतंत्र बिजली फीडर लगाए जा रहे हैं। मऊ, लखनऊ, अयोध्या, मुरादाबाद, इलाहाबाद एवं कानपुर सहित कुल 11 विद्युत फीडर पहले ही लगाए जा चुके हैं। इस वित्तीय वर्ष में भी स्वतंत्र फीडर के लिए 1.10 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इससे संत कबीर नगर जनपद में स्वतंत्र विद्युत फीडर स्थापित कर 6000 पावरलूम बुनकरों को लाभान्वित करने की योजना है।

हथकरघा बुनकरों के लिए पुरस्कार योजना
हथकरघा बुनकरों को प्रोत्साहित करने एवं उनमें प्रतिस्पद्र्धा लाने तथा उन्हें पुरस्कार देकर सम्मानित करने के लिए संत कबीर राज्य हथकरघा पुरस्कार योजना चलाई गई है। इसके तहत परिक्षेत्रीय तथा राज्य स्तरीय पुरस्कारों को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय श्रेणी के नकद पुरस्कार के साथ शील्ड, अंगवस्त्रम एवं प्रमाण पत्र प्रदान किया जाता है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में बुनकरों को पुरस्कार देने हेतु 19.85 लाख रुपये की बजट व्यवस्था की गई है।

ब्लाॅक स्तर बनाए जा रहे क्लस्टर
राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम के अन्तर्गत ब्लॉक स्तर पर हथकरघा बुनकरों के लिए क्लस्टर कार्यक्रम चलाया जा रहा है। वाराणसी में मेगा हैण्डलूम क्लस्टर योजना अन्तर्गत दस अन्य क्स्लटर के प्रस्ताव भारत सरकार द्वारा स्वीकृत किए गए। पहले से स्वीकृत क्लस्टर, कानपुर, गोरखपुर, बारांबकी, सीतापुर, हरदोई, अलीगढ़, आगरा, हापुड, चन्दौली, वाराणसी बरेली, आजमगढ़, मऊ, गाजीपुर, ललितपुर, फर्रूखाबाद, मुरादाबाद एवं अमरोहा में चल रहे हैं।

बीमा के जरिए सुरक्षित किए जा रहे बुनकर
हथकरघा बुनकरों हेतु प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना एवं महात्मा गांधी बुनकर बीमा योजना, भारतीय जीवन बीमा निगम के सहयोग से चलायी जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य हथकरघा बुनकरों के लाभार्थी की सामान्य मृत्यु अथवा दुर्घटना में मृत्यु होने की दशा में  तथा पूर्ण एवं अर्द्ध निशक्तता के मामले में बढ़ा हुआ बीमा कवर तथा उपचार बीमा राशि प्रदान करना है, जिसमें बुनकर का अंश मात्र 80.00 रुपये, भारत सरकार का अंश 162 रुपये तथा एलआईसी का अंश 100 रुपये, कुल 342 रुपए वार्षिक प्रीमियम के रूप में रखा गया है। किसी भी कारण से बुनकर की मृत्यु होने या दुर्घटना में मृत्यु या सम्पूर्ण अपंगता पर दो लाख रुपए, आंशिक अपंगता पर एक लाख रुपए की बीमा राशि दी जाती है। प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना में किसी भी कारण से बुनकर की मृत्यु होने पर मदद की व्यवस्था भी की गई है।

बुनकर बीमा योजना में प्रति बुनकर 80 रुपए, भारत सरकार का अंश 290 रुपए, एलआईसी का अंश 100 रुपए का प्रीमियम है। इस योजना में 51 से 60 वर्ष की आयु के दौरान बुनकर की साधारण मृत्य होने पर 60 हजार रुपए, दुघर्टना में मृत्यु अथवा सम्पूर्ण अपंगता पर एक करोड़ रुपए, आंशिक अपंगता पर 75 हजार रुपए की राशि दी जाती है। 

पावरलूम बुनकरों की किसी कारण से मृत्यु अथवा दुघर्टना में मृत्यु होने पर अथवा अपंगता पर दो लाख रुपए और आंशिक अपंगता पर एक लाख रुपए बीमा कवर होता है। 51 से 60 वर्ष की आयु तक पावरलूम कामगारों की साधारण मृत्यु होने पर 60 हजार रुपए, सम्पूर्ण अंपगता पर डेढ़ लाख रुपए, आंशिक अपंगता पर 75 हजार रुपए का कवर है।

प्रधानमंत्री हथकरघा बुनकर मुद्रा योजना वरदान
इस के तहत कई बुनकरों को विभिन्न लाभ प्रदान किए जाते हैं। बुनकर को अधिकतम सात प्रतिशत ब्याज उपादान के साथ 6 प्रतिशत ब्याज दर पर सस्ता ऋण दिया जाता है। मार्जिन मनी प्रोजेक्ट कास्ट का बीस प्रतिशत अधिकतम दस हजार रुपए देय है। बैंक से ऋण स्वीकृत होने पर ऋणी बुनकर को रुपे कार्ड देने का प्रावधान है। बुनकरों के ऋण कवर की भी व्यवस्था की गयी है। व्यक्तिगत बुनकर, मास्टर बुनकर तथा हथकरघा बुनकरों को 50 हजार रुपए से पांच लाख रुपए तक के ऋण स्वीकृत करने की व्यवस्था है। हैण्डलूम वीवर्स मुद्रा पोर्टल के माध्यम से सम्बन्धित बैंकों हेतु मार्जिन मनी ब्याज उपादान एव क्रेडिट गारंटी फीस की धनराशि आॅनलाइन मांग पीएनबी से करने की व्यवस्था की गयी है। इस योजना में अब तक वित्तीय वर्ष 2020-21 में माह नवम्बर तक 183 बुनकरों को 130.60 लाख रुपये के ऋण स्वीकृत किये जा चुके हैं।

निवेश बढ़ाने के उपाय किए जा रहे
प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़ाने तथा निवेश को प्रोत्साहित करने हेतु उ0प्र0 हैण्डलूम, पावरलूम, सिल्क, टेक्सटाइल एवं गारमेंटिंग पालिसी-2017 के प्रावधानों के अनुसार प्रदेश में वस्त्र इकाई स्थापित करने हेतु उद्यमियों को वित्तीय प्रोत्साहन दिया जा रहा है। हथकरघा उद्योग की समस्याओं और कठिनाईयों को हल करने के साथ ही योजनाओं के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों का लाभ बुनकरों को मिल रहा है।

(लेखक हिन्दुस्थान समाचार से संबद्ध हैं।)

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